बाबरी विध्वंस की चार्जशीट में इन 13 नेताओं के नाम, अब ये है स्टेटस
बाबरी विध्वंस मामले में जिन दक्षिणपंथी नेताओं को नामजद अभियुक्त बनाया गया, उनमें लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, अशोक सिंघल, गिरिराज किशोर, विनय कटियार, उमा भारती, विष्णु हरि डालमिया और साध्वी ऋतंभरा के नाम शामिल थे.
बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में कई दिग्गज नेताओं के नाम शामिल हैं. जिनमें बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी समेत 13 नेताओं के खिलाफ सीबीआई ने पूरक चार्जशीट दाखिल की थी. उसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सिर्फ टेक्नीकल ग्राउंड पर इन नेताओं को राहत नहीं दी जा सकती. गौरतलब है कि इस मुकदमे की पहली जांच उत्तर प्रदेश पुलिस की सीआईडी और क्राइम ब्रांच ने की थी. सीआईडी ने फरवरी 1993 में 8 अभियुक्तों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी. इस मुकदमे के ट्रायल के लिए ललितपुर में विशेष अदालत स्थापित की गई थी. जिसे बाद में रायबरेली की विशेष अदालत में ट्रांसफर कर दिया गया था.
ये थे मुख्य आरोपी
इस घटना से जुड़े केस नंबर 198 में पुलिस अधिकारी गंगा प्रसाद तिवारी ने आठ लोगों के खिलाफ राम कथा कुंज सभा मंच से मुस्लिम समुदाय के खिलाफ धार्मिक उन्माद भड़काने वाला भाषण देकर बाबरी मस्जिद गिरवाने का मुकदमा कायम कराया था. विध्वंस के बाद जिन दक्षिणपंथी नेताओं को नामजद अभियुक्त बनाया गया था, उनमें लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, अशोक सिंघल, गिरिराज किशोर, विनय कटियार, उमा भारती, विष्णु हरि डालमिया और साध्वी ऋतंभरा के नाम शामिल थे. उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 153ए, 153बी, 505, 147 और 149 के तहत मुकदमे दायर थे. जिनकी सुनवाई रायबरेली की विशेष अदालत में कई साल चलती रही. इसके बाद कुछ मामले लखनऊ ट्रांसफर हुए तो कुछ सुप्रीम कोर्ट चले गए.
केस नंबर 197 में 6 दिसंबर 1992 को विवादित स्थल को पूरी तरह से ध्वस्त किए जाने के बाद थाना राम जन्मभूमि, अयोध्या के प्रभारी पीएन शुक्ल ने शाम पांच बजकर पन्द्रह मिनट पर लाखों अज्ञात कार सेवकों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा कायम किया था. जिसमें बाबरी मस्जिद गिराने का षड्यंत्र, मारपीट और डकैती शामिल है. यह मुकदमा कई साल तक लखनऊ में चलता रहा, जिसमे अब तक लगभग 100 गवाह पेश हो चुके हैं.
दरअसल, इस घटना से जुड़े मामलों में 49 दक्षिणपंथी नेताओं का जिक्र था. जिनमें से अब तक 12 लोगों की मौत हो चुकी है. इस मामले से जुड़े तकरीबन 55 गवाह भी अब दुनिया में नहीं हैं. बाकी आरोपी जमानत पर बाहर आकर अपने मामलों की पैरवी कर रहे हैं. मार्च 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती और कल्याण सिंह को इस संबंध में नोटिस भी जारी किया था.
बाबरी विध्वंस से जुड़ी सीबीआई की मूल चार्जशीट में जिन प्रमुख नेताओं का आरोपी के तौर पर जिक्र है, उनके बारे में हम यहां आपको बताने जा रहे हैं-
लाल कृष्ण आडवाणी
भाजपा को सबसे ज्यादा फायदा राम मंदिर आंदोलन से ही मिला था. जिसका नेतृत्व उस वक्त लाल कृष्ण आडवाणी खुद कर रहे थे. ये बात दिगर है कि अब वह हाशिए पर हैं. उन्होंने सितंबर 1990 में इस आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए सोमनाथ से अयोध्या तक 10 हजार किलोमीटर लंबी रथयात्रा की थी. वो जहां जहां गए वहां कई स्थानों पर सांप्रदायिक हिंसा हुई. कई लोग मारे गए. लेकिन बिहार में तत्कालीन लालू यादव सरकार ने आडवाणी को गिरफ्तार कर लिया था. सीबीआई की मूल चार्जशीट के मुताबिक आडवाणी अयोध्या में विवादित बाबरी मस्जिद गिराने की ‘साजिश’ के मुख्य सूत्रधार थे. आडवाणी ने 6 दिसंबर 1992 को कहा था, ‘आज कारसेवा का आखिरी दिन है. कारसेवक आज आखिरी बार कारसेवा करेंगे.’
मुरली मनोहर जोशी
लाल कृष्ण आडवाणी के बाद राम मंदिर आंदोलन में बीजेपी नेता जोशी का बड़ा नाम था, जोशी राम मंदिर आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे. 6 दिसंबर को जोशी भी मौके पर मौजूद थे. सीबीआई चार्जशीट के मुताबिक, मस्जिद का गुंबद गिरने पर उमा भारती, आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी से गले मिली थीं.
मुरली मनोहर जोशी समेत कई बीजेपी नेताओं पर आरोप लगा कि 28 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट से प्रतीकात्मक कारसेवा का फैसला हो जाने के बाद भी इन लोगों ने पूरे प्रदेश में सांप्रदायिकता से ओत-प्रोत भाषण दिए, जिनसे सांप्रदायिक जहर फैला था. मुरली मनोहर जोशी फिलवक्त कानपुर से बीजेपी के सांसद हैं.
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