पायलट के खिलाफ मुस्लिम कार्ड, यूनुस साबित होंगे तुरूप का पत्ता?





आखिरकार वसुंधरा राजे अपने चहेते मंत्री यूनुस खान को टिकट दिलवाने में सफल रही हैं. हालांकि यूनुस खान के लिए राह आसान नहीं होगी क्योंकि वसुंधरा राजे ने उन्हें कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट के सामने मैदान में टोंक विधानसभा से उतारा है.

बीजेपी की तरफ से 200 उम्मीदवारों की जारी हुई लिस्ट में पहले अल्पसंख्यक उम्मीदवार के रूप में यूनुस खान का नाम आया है. बीजेपी ने सभी 200 उम्मीदवारों के नाम जारी कर दिए हैं. इनमें एक अल्पसंख्यक उम्मीदवार को टिकट दिया गया है. पिछली बार बीजेपी ने 4 अल्पसंख्यक उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से दो जीते थे.

इस बार बीजेपी के मुस्लिम विधायक हबीबुर्रहमान पहले ही टिकट काटे जाने से खफा होकर कांग्रेस की टिकट पर नागौर से मैदान में उतर चुके हैं. बीजेपी ने अपनी पांचवीं लिस्ट में करीब 8 नामों की घोषणा की है. यूनुस खान डीडवाना से आते हैं और वसुंधरा सरकार में पीडब्ल्यूडी और परिवहन मंत्री हैं.

बताया जा रहा है कि संघ की तरफ से यूनुस खान के नाम पर आपत्ति थी और वसुंधरा राजे की तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें टिकट नहीं मिल पा रहा था. लेकिन आखिर में उन्हें टोंक भेजा गया है. हालांकि, उनका कहना था कि वह टोंक कभी गए नहीं हैं. इसलिए वहां से चुनाव नहीं लड़ना चाहते हैं. वह डीडवाना से टिकट चाह रहे थे. मगर, इस बार बीजेपी ने डीडवाना से नए चेहरे जितेंद्र सिंह को मैदान में उतारा है.

यूनुस खान के टोंक में चुनाव लड़ने की वजह से बीजेपी की पहली लिस्ट में टिकट पाए बीजेपी विधायक अजीत मेहता का टिकट काट दिया गया है. कांग्रेस और बीजेपी दोनों ने टिकट देने के बाद अपने एक-एक उम्मीदवार बदले हैं. बीजेपी में अजीत मेहता का टिकट मिलने के बाद कटा है तो बीकानेर में यशपाल गहलोत का टिकट कटा है.

अजमेर के सांसद रघु शर्मा के खिलाफ केकड़ी विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी ने नया प्रत्याशी राजेंद्र विनायक को मैदान में उतारा है. कोटपूतली में कांग्रेस के राजेंद्र यादव लगातार चुनाव जीतते आए हैं. ऐसे में बीजेपी ने प्रयोग के तौर पर यादव बहुल सीट पर मुकेश गोयल को मैदान में उतारा है. बहरोड को लेकर लगातार बीजेपी के अंदर संघर्ष चल रहा था. इस सीट से श्रम मंत्री जसवंत यादव चुनाव जीते हैं, लेकिन पिछले लोकसभा उपचुनाव में अलवर से वह भारी मतों से चुनाव हार गए थे. मगर जसवंत यादव अपने बेटे मोहित यादव को टिकट दिलवाने में सफल रहे हैं.

अभी तक वसुंधरा सरकार में शामिल छह मंत्रियों ने बगावत कर चुनावी मैदान में ताल ठोकी है. कांग्रेस और बीजेपी में बगावत का, हनुमान बेनीवाल की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी को सबसे ज्यादा फायदा मिल रहा है. जिन्हें कांग्रेस और बीजेपी में टिकट नहीं मिला वो राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी से टिकट ले आए हैं.

  

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